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बिस्तर पर पड़े मरीज की देखभाल और बेडसोर से बचाव
बिस्तर पर पड़े मरीज की देखभाल और बेडसोर से बचाव - सफ़ाई का तरीका, पलटने का समय, भोजन, पानी, दर्द और खतरे के संकेत।
बेडसोर कोई संक्रमण नहीं है जो बुज़ुर्ग को बाहर से लगता है। यह उस दबाव का नतीजा है जब त्वचा और उसके नीचे का मांस हड्डी के खिलाफ़ घंटों दबे रहते हैं और खून का बहाव वहाँ नहीं पहुँच पाता। यह शुरू होता है नितंब के पास, कूल्हे, एड़ी या सिर के पिछले हिस्से पर लाल धब्बे से, और कुछ दिनों में गहरे घाव में बदल सकता है। इसके हर पड़ाव को रोका जा सकता है, और वह रोकथाम कोई सामान नहीं, एक ऐसी दिनचर्या है जिसे घर उतनी ही नियमितता से करे जितनी नियमितता से खाना खाता है।
पलटना ही मूल काम है
जो व्यक्ति खुद नहीं पलट सकता, उसे पलटना ही सबसे कारगर काम है। आम तौर पर जिनकी अपनी हलचल बिल्कुल नहीं है, उन्हें दो-दो घंटे बाद पलटने की सलाह दी जाती है, और जो थोड़ा-बहुत खुद हिल सकते हैं उनमें अंतर रखा जाता है। ये समय-सारणी आपको अस्पताल से घर आते समय या नर्स से मिलती है — उसी पर चलिए, जो कहीं और पढ़ा हो उस पर नहीं, और उसे दीवार पर लिख दीजिए।
वज़न ज़्यादा हो तो पलटी को दो लोगों का काम बनाइए — एक कंधों पर, एक कूल्हों पर, साथ-साथ। उठाने के बजाय सरकाइए; शरीर के नीचे लगी चादर या ड्रॉ-शीट से यह काम आधी मेहनत का रह जाता है और त्वचा को रगड़ने का ख़तरा भी कम हो जाता है।
पलटी के बीच में तकिए आपके साथी हैं। पीठ के पीछे एक तकिया रखकर हल्का झुकाव बनाइए, घुटनों के बीच एक और टखनों के नीचे एड़ी उठाने वाला। एड़ी सबसे जल्दी टूटती है क्योंकि पूरे शरीर का भार बहुत छोटे हिस्से पर पड़ता है।
रोज़ एक बार पूरी त्वचा जाँचिए
जिस हिस्से को आप पलट रहे हैं, उसे ही नहीं — पूरा क्षेत्र खोलकर देखिए। नितंब, दोनों कूल्हे, एड़ी, टखने, कोहनी, कंधे की हड्डियाँ और सिर का पिछला हिस्सा। जिन बातों पर नज़र रखनी है:
- दबाव हटाने पर भी न जाने वाली लाली
- आसपास की त्वचा से गर्म या ठंडा महसूस होना
- बैंगनी या गीली-गीली जगह, या छाला
- कोई दरार, रिसाव या फटी हुई त्वचा
इनमें से कोई भी बात उसी दिन इलाज कर रहे डॉक्टर या आने वाली नर्स की सूची में जाए। फटी जगह पर अपने हाथ से क्रीम, पाउडर, घरेलू उपाय या पट्टी मत लगाइए — वह घाव की देखभाल है, जो प्रशिक्षित नर्स का काम है।
चादर, कपड़े और नमी
चिकनी, बिना झुर्री वाली कॉटन चादर रखिए। शरीर के नीचे छह घंटे रही एक सिलवट भी त्वचा पर उतना ही दबाव बनाती है जितना आप बचना चाहते हैं। हर पलटने के बाद बिस्तर जाँचिए — सिलवटें, रिमोट, फ़ोन, कलम या कोई तार तो नहीं रह गया।
नमी दूसरा दुश्मन है। पसीना, लीकेज और गिरा हुआ पानी त्वचा को नरम कर देता है और रगड़ की चोट को आसान बना देता है। गीले कपड़े और अंडरपैड तुरंत बदलिए, त्वचा को रगड़ने के बजाय थपथपाकर सुखाइए। प्लास्टिक की चादर सीधे त्वचा पर मत बिछाइए, वह पसीना और गर्मी फँसा लेती है। बैरियर क्रीम या विशेष गद्दा तभी इस्तेमाल कीजिए जब नर्स ने सलाह दी हो।
खाना, पानी और निजी सफ़ाई
खून की कमी से टूटी हुई त्वचा जल्दी ठीक नहीं होती। दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाते रहिए, सिर्फ़ खाने के साथ नहीं। अगर बुज़ुर्ग बहुत कम खा रहे हैं, तो यह बात इलाज कर रहे डॉक्टर या डायटीशियन से पूछिए — प्रोटीन, विटामिन और शुगर का नियंत्रण त्वचा के ठीक होने को सीधे प्रभावित करते हैं, और बिस्तर पर पड़े मरीज की डायट योजना एक नैदानिक फ़ैसला है, घर में बनाई हुई नहीं।
निजी सफ़ाई का भी समय तय कीजिए — दिन में कम से कम एक बार और हर बार गीला होने पर। साबुन के बजाय सादा पानी, सुखाने के बाद ही डायपर या अंडरपैड लगाना, और ढीले, साफ़, सूखे कपड़े। साथ में बात करते रहिए जो कर रहे हैं — लाज और आत्मसम्मान दोनों की रक्षा इसी से होती है।
ये काम सिर्फ़ प्रशिक्षित नर्स के
परिवार और अटेंडेंट का काम है — पलटना, त्वचा जाँचना, पानी पिलाना, साफ़-सूखी चादर, निजी सफ़ाई और बदलाव की सूचना देना। इंजेक्शन लगाना, घाव की ड्रेसिंग, कैथेटर की देखभाल, ऑक्सीजन और नस से चढ़ने वाली बोतल लगाना या उतारना — ये सब प्रशिक्षित नर्स या उस क्षेत्र में योग्य व्यक्ति का काम है, किसी अटेंडेंट का नहीं। ज़रूरत पड़ने पर घर पर नर्सिंग सेवा की मदद लीजिए और बिस्तर पर पड़े मरीज की देखभाल में देखभाल के स्तर समझिए।
कब डॉक्टर या नर्स से बात करें
- लाल धब्बा जो दबाव हटाने के बाद भी न जाए — उसी दिन
- त्वचा फटना, रिसाव, बदबू या बुखार
- बार-बार गिरना, चलने में अचानक दिक्कत, भूख बंद होना या वज़न घटना
- पेशाब में जलन या रुकावट, लगातार कब्ज़
- बार-बार दवा छूटना या नई दवा के बाद नींद/चक्कर की शिकायत
आपात स्थिति में भारत का राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर 112 है। देखभाल का खर्च शहर, घंटों और ज़रूरत के स्तर पर निर्भर करता है, इसलिए उसे हमेशा अनुमानित (indicative) ही समझिए।
आगे क्या पढ़ें
पलटी, जाँच और सफ़ाई — ये तीनों काम साल के हर दिन चलने वाली ड्यूटी हैं, और ड्यूटी के लिए लोग चाहिए। अगर परिवार के पास उतने घंटे नहीं हैं, तो देखभालकर्ता खोजें पर जाकर अपनी ज़रूरत के घंटे और शहर के हिसाब से सांकेतिक मासिक खर्च देख लीजिए — रात की पलटी की ड्यूटी भी उसी में शामिल होती है।
FAQ
आम सवाल
बेडसोर होने में कितना समय लगता है?
लगातार दबाव की वजह से लाल धब्बा कुछ ही घंटों में दिख सकता है, और दबाव बना रहने पर त्वचा एक या दो दिन में फट भी सकती है। इसलिए रोकथाम को हफ़्तों में नहीं, घंटों में मापिए। जो लाल धब्बा दबाव हटाने के बाद भी न जाए, उसकी सूचना उसी दिन इलाज कर रहे डॉक्टर या आने वाली नर्स को दें।
त्वचा फट चुकी है, क्या घर पर क्रीम या पट्टी लगा सकते हैं?
नहीं। त्वचा फटने के बाद वह घाव की देखभाल हो जाती है, किसी क्रीम या घरेलू उपाय का विषय नहीं। उसे प्रशिक्षित नर्स से जाँचवाइए, ड्रेसिंग करवाइए और ड्रेसिंग का समय-सारणी उन्हीं से तय कीजिए; इलाज कर रहे डॉक्टर को भी बताइए। परिवार का काम वह है जो इसे बिगड़ने से रोकता है — पलटना, सूखी त्वचा, साफ़ चादर और बदलाव की सूचना।
रात में पलटने से बुज़ुर्ग मना कर देते हैं, क्या करें?
रात की पलटी सबसे ज़्यादा छूटती है और उसी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। शाम जल्दी पलटना शुरू कीजिए ताकि नींद में नया शेड्यूल शुरू न हो; नई पोज़ीशन को तकियों से टिकाइए; और नर्स को इस इनकार के बारे में बताइए, चुपचाप पलटी छोड़ मत दीजिए। रात का दर्द या जकड़न भी वह जानकारी है जो इलाज कर रहे डॉक्टर को बतानी चाहिए।
स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
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